दोस्ती
वो लम्हे बहुत याद आते है,
कितनी यादे संग छोड़ जाते है,
मुड़ के देखता हूँ आज पीछे तो याद आते है,
दोस्तों के संग बिताये हुए वो प्यारे लम्हे |
एक अनजान डगर एक अनजान सफर
इस अनजान सफर में अपना ना कोई रहगुज़र
गिर कर संभलना खुद ही समझ आता है
परायो के बीच अपनों की याद दिला जाता है
मिलते है दोस्त हर किसी मोड़ पर , हर किसी छोर पर
ना होती है उनकी कोई डोर ना कोई छोर
याद आते है वो बीते लम्हे बीते बाते
अपने यारो के संग बितायी प्यारी मुलाकाते
संघर्षो के बीच नजाने कब ऐतबार हो गया
कोई प्यारा सख्श अपना यार हो गया
वो वेल्ले पंती मस्ती मज़ाक
वो चोराहे के नुक्कड़ की चाय
वो एग्जाम की राते
वो टेंशन भरी बाते
नये रंग नये मौसम के संग
सफलता पाने की एक नयी जंग
सपनों के नयी रोशनी के संग
आँखोँ में क़ुछ कर गुज़रने की वो जंग
अपनों से दुर ले आयी यारो तेरी संग
< अपनी तो यही रीत है ,अपनी यारी में ही अपनी जीत है >
WRITTEN BY - ANSH SRIVASTAVA

Nyc yrr.... heart touching
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